“ठाकुर हूं मैं…” बैंक के अंदर दबंगई! HDFC ब्रांच का वीडियो वायरल

अजमल शाह
अजमल शाह

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Panki) में स्थित HDFC Bank की एक शाखा इन दिनों गलत वजहों से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक महिला बैंक कर्मचारी और महिला खाताधारक के बीच तीखी बहस साफ देखी जा सकती है, जो धीरे-धीरे गाली-गलौज और जातिसूचक भाषा तक पहुंच जाती है।

विडंबना यह कि जिस जगह पर customer service और dignity सबसे जरूरी होती है, वहीं कथित तौर पर दबंगई का प्रदर्शन किया जा रहा है।

‘ठाकुर हूं मैं… ऐसी की तैसी कर दूंगी’ – वीडियो में क्या दिखा?

वायरल क्लिप में महिला कर्मचारी खुद को “ठाकुर” बताते हुए महिला ग्राहक को धमकाती नजर आती है।
आवाज़ें तेज़ होती हैं, भाषा बिगड़ती है और माहौल इतना गर्म हो जाता है कि अन्य ग्राहक और कर्मचारी बीच-बचाव करते दिखते हैं

यह सिर्फ एक बहस नहीं थी, बल्कि एक ऐसा दृश्य था जिसने बैंकिंग सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए।

Customer Service या Caste Power? 

बैंक पासबुक और चेकबुक देने की जगह अगर जाति का परिचय, दबदबे की धमकी, अभद्र भाषा मिलने लगे, तो सवाल सिर्फ एक कर्मचारी का नहीं, पूरे सिस्टम की ट्रेनिंग और मॉनिटरिंग का बनता है।

Social Media Reaction: यूजर्स का गुस्सा फूटा

वीडियो वायरल होते ही ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यूजर्स ने HDFC Bank को टैग किया। महिला कर्मचारी आस्था सिंह पर कार्रवाई की मांग की। जाति-आधारित टिप्पणी की कड़ी निंदा की। लोगों का कहना है कि “बैंक में ग्राहक जाति नहीं, खाता लेकर जाता है”

कानूनी और नैतिक सवाल

भारत में जातिसूचक भाषा न केवल सामाजिक अपराध है बल्कि कई मामलों में कानूनी कार्रवाई के दायरे में भी आती है।
ऐसे में सवाल उठता है क्या बैंक कर्मचारी व्यक्तिगत पहचान के आधार पर ग्राहक को धमका सकता है? क्या प्राइवेट बैंकों में grievance redressal सिर्फ कागज़ों तक सीमित है?

अब निगाहें टिकी हैं HDFC Bank Management, Local Administration पर कि क्या यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित रहेगा या वास्तविक कार्रवाई भी देखने को मिलेगी।

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